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सूना सूना सा लगे ये दिन,
और ये रात्हें.
रास्ते ज़िन्दगी के,
लगने लगा है सूना.
पदों के हर एक डाली,
हैं सूना सूना सा,
न है कोई हवा का जोंखा,
जो गिराए पत्ते इन सूने रास्तों में.
इस सूनेपन का क्या है मतलब?
एक खामोशी सा चाई हुयी है हर जगह.
क्या यह मौत की खामोशी है?
या मेरे मनन की.
क्यों है सूनापन?
और घुटन भरी खामोशी.
घुट रही है दम,
इस अकेलेपन से?
आए कोई इस खालीपन में,
खिल्किलाठे और चेह्क्ठे हुए.
और खिले हर एक डाली,
फूलों और पथों से.